Kabir sing dialogue

Kabir sing dialogue

Kabir singh movie dialogue : 

Kabir singh movie dialogue
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की ढार, जो उतरा सो डोब गया,जो दोआबा तोर
दरिया का पानी, लहेरे, शोर है हां शांति, जिसाई शूर लगै उसने कभी प्यार नहीं किया या जिन्हाई ये खमोशी तू जय उहै वक़्त, हलात, परशानी जुदा कर सकत है पार अलाग नाहे
फुटबॉल एक हिंसक खेल है विरोधी के जोन में घुसे के गोल कर्ण, हमाने के जोन में घोसी से उसई गोल कारने से, मुजहाई से याई से खेल खेल में मेरी है सर
मुख्य चुप न रहसकता, चुप रह एक अदत बन जते है, जो मैदान पे वो ना जीवन में भ
मैं एक रिबेल के बिना विद्रोही नहीं हूं, न ही एक हैंड ब्लेड के साथ एक मर्डरर।” यह मैं हूँ
तेरे लिया कुच भी कर सकत हूं प्रीति आगर तुझमे भइ मेरे लई वास पगलपन है ना ना मुझे फोन करने के लिए अन्य मुझे पता है
जीवन में एक समय ऐसी एक है जब अंधर से घनती बजती है तब बैंड कर दिया छइयै उप नाहे से यई बंदा गया
डर तुमारा बदन में मेरे ज़हर के तारन
कैसा छीछोरा है बे हं डेली नाडा ढेला होटा जा रह है क्या।
ज़िन्दगी में कैसी ये चेहे के गहराइ तक पहोचो ना ना हाथ में लगाइए सिरफ़ ज़ीरो या तोहरा भई जीरो के बहोत गाएब है
मेडिकल प्रोफेशन मे जो इंसना अपना गुसा कंट्रोल नाहे कारसक्ता है वो सर्जिकल ब्लेड हाथ में लियाई एक मर्डर से जियादा कुछ ना है
जब एक महिला एक प्यार में होती है तो उसकी प्राथमिकता बदल जाती है इसे समझें
पीड़ित व्यक्तिगत है उसे पीड़ित
यह अलविदा नहीं है, लेकिन यह फ़्लैशबैक है कि अनुसरण करता है

Label : Killer gaming

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*